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इक दिया जलता रहा हरदम हवा के सामने

इक दिया जलता रहा हरदम हवा के सामने टिक न पायीं गर्दिशें  माँ की दुआ के सामने, तय करें, ईमान से किसने गुज़ारी ज़िन्दगी, देखते हैं आइये , चल कर ख़ुदा के सामने। सीख ही लेगा कभी वो मयपर...